नई दिल्ली: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा (4-5 दिसंबर 2025) रक्षा जगत में भूचाल ला सकता है। S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की सफलता के बाद अब भारत S-500 प्रोमेथियस सिस्टम खरीदने की तैयारी में जुटा है। यह सौदा न सिर्फ भारत की हवाई सीमा को अभेद्य बनाएगा, बल्कि चीन-पाकिस्तान की हाइपरसोनिक मिसाइलों के सपनों पर पानी फेर देगा। पुतिन-मोदी शिखर सम्मेलन में Su-57 फाइटर जेट्स के साथ S-500 पर चर्चा की उम्मीद है, जो 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का सौदा हो सकता है।
S-500: S-400 से भी आगे, हाइपरसोनिक खतरे का काल
S-400 ने मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी ड्रोन हमलों को 95% नाकाम कर भारत की हवाई ताकत दिखाई। लेकिन अब S-500 की बारी है – यह रूस का सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम है, जो 600 किमी रेंज तक 12 बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें एक साथ मार गिरा सकता है। ऊंचाई 200 किमी तक, जहां लो-ऑर्बिट सैटेलाइट भी निशाने पर। रूस ने जुलाई 2024 में भारत को जॉइंट प्रोडक्शन का ऑफर दिया था, और दुबई एयरशो 2025 में डिप्टी पीएम डेनिस मंटुरोव ने कहा, “S-400 यूजर्स जैसे भारत के साथ S-500 पर बातचीत तैयार।”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हालिया मीटिंग में S-400 के 5 अतिरिक्त स्क्वाड्रन की बात कही, लेकिन सूत्र बताते हैं कि S-500 पर फोकस शिफ्ट हो गया है। एक रेजिमेंट (8 लॉन्चर) की कीमत 8,000-10,000 करोड़ रुपये, लेकिन 50% तक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ मेक इन इंडिया में बनेगी। रूस की अल्माज-अन्टे सिस्टम के साथ भारत की HAL और भारत डायनामिक्स लिमिटेड इसमें पार्टनर होंगी।
पुतिन दौरा: रक्षा से ऊर्जा तक 25+ समझौते
पुतिन 2022 के बाद पहली बार भारत आ रहे हैं। 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, S-500 के अलावा Su-57 स्टील्थ जेट्स (लंबी दूरी की BVR क्षमता के साथ) और पैंटसिर मिसाइल सिस्टम पर डील फाइनल हो सकती है। रूस ने S-400 की बकाया डिलीवरी 2026-27 तक पूरी करने का भरोसा दिया है।
भारत-रूस रक्षा व्यापार 60% से ज्यादा रूसी हथियारों पर निर्भर है – ब्रह्मोस, AK-203 से लेकर S-400 तक। लेकिन अब फोकस जॉइंट प्रोडक्शन पर है, जो आत्मनिर्भर भारत को बूस्ट देगा। ऊर्जा क्षेत्र में रूस से तेल आयात 1/3 हिस्सा, और व्यापार लक्ष्य 2030 तक 100 अरब डॉलर।
चीन-पाक को चुनौती: हाइपरसोनिक युग में भारत का किला
चीन की DF-17 हाइपरसोनिक मिसाइलें और पाक की शाहीन बैलिस्टिक मिसाइलें अब भारत के लिए खतरा नहीं रहेंगी। S-500 की हिट-टू-किल तकनीक (77N6-N मिसाइलें) 3-4 सेकंड में रिस्पॉन्स देगी, जो S-400 के 9-10 सेकंड से बेहतर। अमेरिकी दबाव (CAATSA सैंक्शंस) के बावजूद भारत रूस के साथ खड़ा है – जैसा कि ट्रंप काल में S-400 डील हुई। रूसी मीडिया मिलिट्री रूसिया के संपादक दिमित्री कोरनेव ने कहा, “S-500 ने हाइपरसोनिक लक्ष्यों को सफलतापूर्वक रोका। भारत के लिए परफेक्ट।” ब्लूमबर्ग रिपोर्ट में सूत्रों ने बताया कि पुतिन यात्रा में कोई बड़ा साइनिंग नहीं, लेकिन रोडमैप तैयार होगा। यह साझेदारी भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करेगी। S-500 से न सिर्फ सीमा सुरक्षा, बल्कि स्पेस डिफेंस भी मुमकिन। दुनिया की नजरें दिल्ली पर – क्या भारत का ‘सुपर शील्ड’ जल्द हकीकत बनेगा?


