काजू (Cashew) खाने के शौक़ीन ध्यान दें
क्या आप भी पैकेट खोलते ही मुट्ठी भर काजू खा लेते हैं? अगर हाँ, तो आप अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफार्म X (पूर्व में ट्विटर) पर कई आयुर्वेद और हेल्थ एक्सपर्ट्स ने काजू खाने के ‘आम तरीके’ को लेकर चेतावनी दी है। जिसे आप सेहत का खजाना समझ रहे हैं, गलत तरीके से खाने पर वही आपके पेट में ‘जहर’ (टॉक्सिन्स) पैदा कर सकता है।
आखिर क्या है वो गलती जो 96% लोग करते हैं?
ज्यादातर लोग काजू को कच्चा (Raw) या फिर नमक और तेल में तलकर (Roasted/Fried) खाते हैं। न्यूट्रिशन साइंस के अनुसार, कच्चे काजू में ‘फाइटिक एसिड’ (Phytic Acid) नाम का एक तत्व होता है। यह एसिड आपके शरीर में जाकर मिनरल्स (जैसे जिंक, आयरन और कैल्शियम) को सोखने से रोकता है। आसान भाषा में कहें तो, आप काजू खा तो रहे हैं, लेकिन उसका फायदा आपके शरीर को मिल ही नहीं रहा है।
आयुर्वेद क्या कहता है
आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार, काजू की तासीर ‘गर्म’ (Garam) होती है। इसे बिना शोधित किए (बिना भिगोए) खाने से शरीर में पित्त बढ़ता है, जिससे सीने में जलन, मुंहासे और पेट की गर्मी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
काजू को ‘अमृत’ बनाने का सही तरीका (Scientific Method):
क्सपर्ट्स और डाइटीशियन का मानना है कि काजू का पूरा लाभ लेने के लिए इसे ‘भिगोकर’ (Soaked) खाना चाहिए।
- कैसे खाएं: रात को 4-5 काजू एक कप पानी में भिगो दें।
- समय: सुबह खाली पेट या नाश्ते के समय इनका सेवन करें।
- फायदा: 6-7 घंटे पानी में भीगने से इसका ‘फाइटिक एसिड’ निकल जाता है और इसकी गर्म तासीर भी सामान्य हो जाती है। यह पचने में हल्का हो जाता है और शरीर इसके पोषक तत्वों (मैग्नीशियम, गुड फैट्स) को 100% सोख पाता है।


