आपके गमले में लगा साधारण सा दिखने वाला एलोवेरा (Aloe Vera) सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि औषधीय गुणों का खजाना है। अक्सर हम इसका इस्तेमाल सिर्फ चेहरे की चमक बढ़ाने या बालों को रेशमी बनाने के लिए करते हैं, लेकिन हालिया मेडिकल रिसर्च और आयुर्वेद के दावे कुछ और ही इशारा कर रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि एलोवेरा का सही तरीके से सेवन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी कम कर सकता है?
एलोवेरा में क्या है खास? (Science Behind The Plant)
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफॉर्मेशन (NCBI) और कई इंटरनेशनल स्टडीज के मुताबिक, एलोवेरा में ‘एलो इमोडिन’ (Aloe-emodin) नामक एक कंपाउंड पाया जाता है। यह कंपाउंड शरीर में कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने (Inhibit growth) में मददगार साबित हो सकता है। इसके अलावा इसमें भरपूर मात्रा में पॉलीफेनोल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर को ‘फ्री रेडिकल्स’ से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। आसान भाषा में कहें तो, यह आपकी कोशिकाओं को डैमेज होने से रोकता है, जो कैंसर की शुरुआत का एक बड़ा कारण है।
सेवन का सही तरीका: कहीं आप जहर तो नहीं खा रहे?
यहीं पर अधिकतर लोग गलती करते हैं। एलोवेरा का पत्ता तोड़ते ही उसमें से जो पीला पदार्थ (Yellow Latex/Aloin) निकलता है, वह शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक सही तरीका:
- पत्ते को काटने के बाद उसे 15-20 मिनट के लिए खड़ा कर दें ताकि पीला पदार्थ (लेटेक्स) पूरी तरह निकल जाए।
- इसे अच्छी तरह धोएं और सिर्फ पारदर्शी जेल (White Gel) का ही इस्तेमाल करें।
- जूस: सुबह खाली पेट 20ml एलोवेरा जूस को गुनगुने पानी या आंवला जूस के साथ मिलाकर पीना सबसे कारगर माना जाता है।
सावधानी: गर्भवती महिलाएं और किडनी की समस्या वाले मरीज डॉक्टर की सलाह के बिना इसका सेवन न करें।
क्या कहते हैं रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया ट्रेंड्स?
आयुष मंत्रालय (Ministry of AYUSH) और कई हेल्थ इन्फ्लुएंसर्स अक्सर जड़ी-बूटियों की ताकत पर जोर देते हैं। हाल ही में कई हेल्थ थ्रेड्स में यह बात सामने आई है कि कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स को कम करने में भी एलोवेरा जूस सहायक हो सकता है (हालांकि, यह इलाज का विकल्प नहीं है)।


