डेंगू और वायरल बुखार के सीजन में पपीते के पत्तों (Papaya Leaves) की कीमत आसमान छूने लगती है। प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए हर कोई पपीते के पत्तों का रस ढूंढता फिरता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस पपीते की टहनी या डंठल (Papaya Twig/Stalk) को आप कचरा समझकर फेंक देते हैं, असल में वो किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है?
सोशल मीडिया और आयुर्वेद के जानकारों के बीच आजकल पपीते की टहनी को लेकर काफी चर्चा है। दावा किया जा रहा है कि इसमें पत्तों से भी ज्यादा औषधीय गुण छिपे हो सकते हैं। आइए, विज्ञान और आयुर्वेद के नजरिए से समझते हैं कि आखिर इस ‘जादुई डंठल’ में ऐसा क्या है।
क्यों खास है पपीते की टहनी? (Scientific Analysis)
पपीते के पत्तों और तने को जोड़ने वाली डंठल (Stalk) में भी वही पोषक तत्व पाए जाते हैं जो इसके पत्तों में होते हैं। कई शोध और आयुर्वेदिक एक्सपर्ट्स मानते हैं कि:
- प्लेटलेट्स का पावरहाउस: जिस तरह पपीते के पत्ते में ‘काइन’ (Chymopapain) और ‘पापेन’ (Papain) नाम के एंजाइम होते हैं, वही एंजाइम इसकी डंठल में भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। कई वैद्य सलाह देते हैं कि अगर पत्ते बहुत कड़वे लगें, तो डंठल का रस भी प्लेटलेट्स काउंट (Platelet Count) को सुधारने में मदद कर सकता है।
- पाचन तंत्र का मित्र: पपीते की टहनी से निकलने वाला सफेद दूध (Latex) पेट के कीड़ों को मारने और पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में सहायक माना जाता है। यह कब्ज और गैस जैसी समस्याओं में रामबाण साबित हो सकता है।
- इम्यूनिटी बूस्टर: इसमें विटामिन ए, सी और ई की अच्छी मात्रा होती है। वायरल बुखार के बाद शरीर में आई कमजोरी को दूर करने के लिए टहनी का काढ़ा (Decoction) एक बेहतरीन देसी नुस्खा है।
जरूरी बात: आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, पपीते की डंठल को अच्छी तरह धोकर, उसे कूटकर उसका रस निकाला जा सकता है या इसे पानी में उबालकर चाय की तरह पिया जा सकता है।
सावधानी भी है जरूरी
यह आर्टिकल जानकारी के लिए है। पपीते की टहनी का रस बहुत शक्तिशाली होता है। गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात का खतरा हो सकता है। साथ ही, अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट खराब हो सकता है।


