आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में सुबह का नाश्ता स्किप करना आम बात हो गई है। ऑफिस की जल्दबाजी, वर्क फ्रॉम होम की लचक या फिर वजन घटाने के चक्कर में लाखों लोग ब्रेकफास्ट को इग्नोर कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये छोटी-सी आदत आपकी सेहत को धीरे-धीरे खोखला कर रही है? हालिया रिसर्च और एक्सपर्ट्स की मानें तो नाश्ता न करने से टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, मोटापा और कमजोर इम्यूनिटी जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के स्टडीज में पाया गया है कि ब्रेकफास्ट स्किप करने वालों में हार्ट डिजीज का रिस्क 27% तक बढ़ जाता है।
1. टाइप-2 डायबिटीज का खतरा दोगुना:
सुबह नाश्ता न करने से ब्लड शुगर लेवल बिगड़ जाता है। रातभर की फास्टिंग के बाद शरीर को एनर्जी की जरूरत होती है, लेकिन स्किप करने पर इंसुलिन सेंसिटिविटी कम हो जाती है। एक मेटा-एनालिसिस स्टडी (PMC) में देखा गया कि नियमित ब्रेकफास्ट स्किपर्स में डायबिटीज का रिस्क 40% ज्यादा होता है। खासकर महिलाओं और 40+ उम्र वालों के लिए ये घातक है।
2. हार्ट अटैक और स्ट्रोक का डर:
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी में 26,000 से ज्यादा पुरुषों पर रिसर्च हुई, जिसमें पाया गया कि नाश्ता न करने वालों में कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा 27% बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर अनकंट्रोल्ड हो जाता है और कोलेस्ट्रॉल लेवल ऊंचा चढ़ता है। अपोलो हॉस्पिटल्स के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार की चेतावनी है कि ये आदत कार्डियोवस्कुलर डेथ का रिस्क 28% तक बढ़ा देती है।
3. मोटापा और बेली फैट का जाल:
कई लोग सोचते हैं कि नाश्ता स्किप करने से वजन कंट्रोल होगा, लेकिन उल्टा असर होता है। स्टैनफोर्ड लाइफस्टाइल मेडिसिन की रिव्यू में बताया गया कि ब्रेकफास्ट न करने से मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है, जिससे दिन में ज्यादा कैलोरी इनटेक हो जाता है। रिजल्ट? ओबेसिटी का रिस्क 48% बढ़ना। खासकर पेट की चर्बी जमा होने से मेटाबॉलिक सिंड्रोम हो जाता है।
4. इम्यूनिटी कमजोर, इन्फेक्शन का खतरा:
नाश्ता स्किप करने से बॉडी को जरूरी न्यूट्रिएंट्स – विटामिन, मिनरल्स और प्रोटीन – नहीं मिलते। ओनली माय हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ता है और इन्फेक्शन, कैंसर का रिस्क 34% तक बढ़ जाता है। साइंसडायरेक्ट की सिस्टेमेटिक रिव्यू में भी पाया गया कि ये आदत क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन को ट्रिगर करती है।
5. मूड स्विंग्स और दिमागी थकान:
एनर्जी लेवल डाउन होने से चिड़चिड़ापन, हेडेक और फोकस की कमी हो जाती है। वेबएमडी की स्टडी में देखा गया कि ब्रेकफास्ट स्किपर्स में स्ट्रेस हॉर्मोन कोर्टिसोल बढ़ जाता है, जो डिप्रेशन और स्ट्रोक का कारण बन सकता है। बच्चों में तो ये मूड डिसऑर्डर का बड़ा रिस्क है।
तो क्या करें? आसान टिप्स
- परफेक्ट टाइम: सुबह 7-9 बजे के बीच नाश्ता करें। प्रोटीन-रिच चीजें जैसे अंडा, दही, ओट्स या फल लें।
- इंटरमिटेंट फास्टिंग?: अगर कर रहे हैं, तो डॉक्टर से कंसल्ट करें। 40+ उम्र वालों के लिए रिस्की है।
- रिप्लेसमेंट: अगर भूख न लगे, तो स्मूदी या नट्स से शुरू करें।


